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मसाला नहीं, स्वाद और सेहत की विरासत है "बुकनू"
डिजिटल टीम :
उत्तर प्रदेश के कानपुर की गलियों से निकला ‘बुकनू’ केवल एक मसाला नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आयुर्वेदिक परंपरा का स्वादिष्ट हिस्सा है, जो स्वाद के साथ साथ एक दवा की तरह ही काम करता है, भले ही बाजार में किस्म-किस्म के मसालों की भरमार हो लेकिन बुकनू मसाले के अगल बगल कोई भी दूसरा बाजारू मसाला नहीं टिकता है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने हमेशा स्वाद के साथ साथ सेहत का भी हमेशा ख्याल रखा जो अपने आप में उच्च संस्कृति को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की इस अनमोल विरासत को इसके खास पाचक गुणों के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर परांठे, पूरी या सादे दाल-चावल पर हल्का-सा छिड़क कर खाया जाता है, जिससे स्वाद और सेहत, दोनों का संतुलन बना रहता है और उत्तर भारत में कई जगह बुकनू को चूर्ण की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इसको बनाते समय लोग अपने सेहत के हिसाब से थोड़ा फेरबदल करके भी बनाते हैं।
"बुकनू" मसाला सोंठ, काला नमक, हींग, मेथी, अजवाइन, हल्दी, जीरा और कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों का संतुलित मिश्रण है, जो साधारण से साधारण भोजन को भी लाजवाब बनाने के साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत रखता है जिससे पेट की बीमारियों पर हमेशा काबू रहता है।
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